उमेश चौहान@झाबुआ
बैतूल-अहमदाबाद फोरलेन हाइवे के माछलिया घाट पर जो 211 करोड़ का नया निर्माण हुआ था, उसने दो साल में ही अपने घटियापन से सड़कों की सुरक्षा को मज़ाक बना दिया है। यहां पुल पर सड़क के ज्वाइंट सेक्शन का हाल ये हो चुका है कि सीमेंट उखड़ गई, सरिए हवा में झूल रहे हैं और जगह-जगह खतरनाक गड्ढे बन गए हैं। पुल के ज्वाइंट पर इतना बड़ा छेद बन गया कि लोहे की सरिये बाहर झाँक रही हैं और सीमेंट सड़क से उड़ गई है। तस्वीरें गवाही दे रही हैं कि किस तरह भ्रष्टाचार, घटिया सामग्री और निर्माण में घोर लापरवाही के चलते जनता की जान से खिलवाड़ किया गया है। रोड हादसों को खुला निमंत्रण देता है और अधिकारी मूकदर्शक बनकर देखते रह जाते हैं। टोल टैक्स पूरा, सुरक्षा जीरो:
नेशनल हाईवे अथॉरिटी और टोल कंपनी जनता की जेब से हजारों करोड़ वसूल रही है, लेकिन सड़क की मरम्मत और मेंटेनेंस पर फूटी कौड़ी लगाने को तैयार नहीं। हालात ये हैं कि पुल में पड़े इस गड्ढे की वजह से एक तरफ की पूरी लेन बंद करनी पड़ी, वहीं दूसरी तरफ से हीलाहवाली के साथ भारी वाहन गुजरते रहे। क्या यही है हिंदुस्तान के नई सड़कों का विकास? वाहनों की लंबी कतारें और लोगों की जान हलक में! लापरवाही की हद – जनता की जान से खिलवाड़:
-मुख्य हाईवे पर बने ज्वाइंट का टूटना इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी भूल है।
-सड़क के केवल 2 साल में ही उखड़ने का मतलब है, भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और निगरानी में भारी चूक।
-टोल कंपनी के कर्मचारी सिर्फ टोल वसूलने में व्यस्त हैं, न कोई रिपेयरिंग, न अलर्ट – जनता की सुरक्षा रामभरोसे! हादसों की फेहरिस्त लंबी, कार्रवाई जीरो:
माछलिया घाट की ढलान और घुमाव पहले से ही कुख्यात है। यहां पहले भी दर्जनों जानलेवा हादसे हो चुके हैं और अब ये नया ज्वाइंट टूटना कभी भी बड़ा हादसा करा सकता है। इसके बावजूद न हाईवे अथॉरिटी का कोई अफसर मौके पर दिखा, न मरम्मत का कोई इंतजाम। आरोप–प्रत्यारोप नहीं, सख्त कार्रवाई चाहिए:
-आखिर जनता से वसूला गया करोड़ों का टोल पैसा गया कहां?
-निर्माण एजेंसी, सुपरविजन इंजीनियर, टोल कंपनी – हर स्तर की जवाबदेही तय हो।
-चाहिए तत्काल एफआईआर, ठेकेदार की ब्लैकलिस्टिंग और सरकारी लापरवाह अफसरों की सस्पेंशन। जनता का सवाल – अब मौत चाहिए या सुरक्षा?
यदि शासन-प्रशासन की आंखें अब भी नहीं खुलीं, तो बड़े हादसे की पूरी जिम्मेदारी NHAI, प्रशासन और टोल कंपनी की होगी। जनता अब और बर्दाश्त नहीं करेगी – जवाब चाहिए, कार्रवाई चाहिए, और तुरंत चाहिए!