पराक्रम और परंपरा का संगम: मदरानी में शस्त्र पूजन सम्पन्न

हितेंद्र पंचाल मदरानी

 विजयादशमी पर्व के पावन अवसर पर मदरानी नगर में परंपरागत शस्त्र पूजन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। 30 सितम्बर 2025 को लुहार टोडी मोहल्ले में प्रथम पूजन विधिविधान से किया गया, वहीं 1 अक्टूबर को नगर के मुख्य बाजार में सामूहिक शस्त्र पूजन एवं भारतमाता की आरती संपन्न हुई।

पूरे नगर में पर्व जैसा उत्सव दिखाई दिया। इस अवसर पर तलवार, भाला, धनुष-बाण, ढाल, बंदूक सहित विभिन्न पारंपरिक शस्त्रों का पूजन कर शक्ति और साहस के प्रतीक इन अस्त्र-शस्त्रों के प्रति श्रद्धा प्रकट की गई।

श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, दीप प्रज्वलन और मां दुर्गा की आरती के साथ राष्ट्र और समाज की उन्नति हेतु आशीर्वाद मांगा। ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्ति गीतों के बीच पूरा वातावरण धार्मिक उत्साह और देशभक्ति से सराबोर हो उठा।

स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि यह परंपरा वर्षों से नगर की पहचान रही है। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन वीरता, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है।

इस अवसर पर शस्त्र पूजन का मंगल श्लोक भी गूंज

“शस्त्राणि शास्त्राणि च पूजयामः,
वीर्यं बलं धैर्यमथो जयाय।
देवी प्रसन्ना भवतु प्रसन्ना,
सिद्धिर्भवेत् कार्यसु सर्वदा।”

(अर्थ – हम शस्त्र और शास्त्र दोनों की पूजा करते हैं, ताकि बल, वीर्य और धैर्य से विजय प्राप्त हो। माँ दुर्गा प्रसन्न होकर हमें सभी कार्यों में सफलता प्रदान करें।)

कार्यक्रम में नगरवासी, स्वयंसेवक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह आयोजन मदरानी की गौरवशाली परंपरा और राष्ट्रभक्ति की भावना का जीवंत प्रतीक बन गया।