ग्राम मदरानी में आस्था और श्रद्धा का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला जब सत्यवीर तेजाजी महाराज मंदिर परिसर में रात्रि जागरण भजन का आयोजन हुआ। भजन संध्या में भक्तों ने भक्ति रस में डूबकर भजनों का आनंद लिया।
अगली सुबह भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन शामिल हुए। शोभायात्रा के पश्चात तेजाजी महाराज मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। परंपरा अनुसार मंदिर प्रांगण में ताती तोड़ने की रस्म अद्भुत दृश्य लेकर आई। श्रद्धालुओं की अधिक संख्या को देखते हुए इस बार ताती 2 दिन तक सतत् तोड़ी गई। पूरे आयोजन में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
*सत्यवीर तेजाजी महाराज का जीवन चरित्र*
सत्यवीर तेजाजी महाराज राजस्थान की धरती पर जन्मे वीर योद्धा, लोकदेवता और जननायक के रूप में पूजे जाते हैं।
जन्म : तेजाजी का जन्म नागवंशी जाट परिवार में हुआ।
स्वभाव : बचपन से ही तेजाजी न्यायप्रिय, सत्यनिष्ठ और पराक्रमी थे।
लोकदेवता की मान्यता : उन्हें नागों के देवता और सर्पदंश से रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।
*महत्वपूर्ण घटना : अपने वचनों के पक्के और सत्यप्रिय होने के कारण उन्हें सत्यवीर कहा जाता है।*
सर्पदंश की कथा : लोककथाओं के अनुसार, उन्होंने वचन निभाने हेतु मृत्यु के समय भी नाग को अपना शरीर दंश करने दिया और उस सत्यनिष्ठा के कारण नागदेवता ने आशीर्वाद दिया कि जो कोई व्यक्ति सर्पदंश पीड़ित को तेजाजी की पूजा करेगा, उसे जीवनदान मिलेगा।
तेजाजी महाराज की गाथाएँ आज भी ग्रामीण अंचलों में गीत और भजनों के माध्यम से गाई जाती हैं। उनकी पूजा विशेषकर राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में बड़े उत्साह और श्रद्धा से की जाती है।