करड़ावद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य मे शोभायात्रा के साथ हिंदू सम्मेलन का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। सम्मेलन स्थल संतोष मैरिज गार्डन पर भारत की गौरवशाली संस्कृति, परंपरा एवं मूल्यों को प्रदर्शित करने वाली विविध प्रदर्शनी लगाई गई, जो समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनी। कार्यक्रम से पूर्व विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गई। बालिकाओं द्वारा मन पढ़े सो प्राण दे यही तो स्वर शक्ति मान है प्रस्तुत नृत्य ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में संत श्री 1008 महामण्डलेभ्यर स्वामी मधुसूदनानंद गिरी जी महाराज श्री पंचायती निरंजनी अखाडा,
मातृशक्ति संगीता जी त्रिवेदी तथा सह प्रांत व्यवस्थापक प्रमुख श्री बलवंत जी हाड़ा उपस्थित रहे। मधुसूदनानंद दास गिरि जी महाराज ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि धर्म सुरक्षित रहेगा तो राष्ट्र सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन समाज को जागृत करते हैंआज समय को आवश्यकता हैं। युवाओं को राष्ट्र की धरोहर बताते हुए उन्होंने राष्ट्र एवं स्वयं की रक्षा को युवा पीढ़ी का परम कर्तव्य बताया।
संगीता त्रिवेदी ने सनातन धर्म, संघ के पंच परिवर्तन एवं समाज में उनके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने टंट्या मामा के समाज हित में दिए गए योगदान का स्मरण करते हुए बच्चों को शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया। साथ ही सनातन परा के सोलह संस्कारों का उल्लेख करते हुए संघ के पंच परिवर्तन स्वदेशी, विरण, समरसता, नागरिक कर्तव्यएवं कुटुंब प्रबोधन पर अपने विचार व्यक्त किए।
सह प्रांत व्यवस्थापक प्रमुख श्री बलवंत हाड़ा ने कहा कि संघ के 100 वर्षों की तपस्या और सतत संघर्ष का परिणाम आज हिंदू सम्मेलन के रूप में समाज के सामने है। उन्होंने कहा कि इस शताब्दी यात्रा में मातृशक्ति का समर्पण सर्वाधिक अनेक माताओं ने अपने पुत्रों को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया, उसी त्याग और तपस्या के कारण आज संघ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
*1925 से संघ निरंतर राष्ट्र सेवा का कार्य कर रहा बलवंत हाड़ा*
उन्होंने कहा कि 1925 से संघ निरंतर एक ही गति, एक ही लक्ष्य और एक ही विचार के साथ समाज के बीच रहकर राष्ट्र सेवा का कार्य कर रहा है। हिंदू समाज ने इतिहास में अनेक आक्रांताओं और अत्याचारों को सहा है। 1902 में वंदे मातरम् पर प्रतिबंध के बावजूद बालक केशव ने विद्यालय में उसका उद्घोष किया और दंड सहकर भी राष्ट्रभक्ति के मार्ग से विचलित नहीं हुए। भारतमाता के प्रति यही प्रेम और समर्पण संघ की स्थापना का आधार बना।
*गर्व से कहो हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है*
उन्होंने महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, बिरसा मुंडा और बाजीराव जैसे पराक्रमी वीरो का स्मरण करते हुए कहा कि भारत सदैव वीरों की भूमि रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वावलंबन के क्षेत्र में सेवा भारती द्वारा किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज से जनजातीय गर्व के साथ कहा, गर्व से कहो हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है। कार्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए तन, मन और धन से सहयोग कां आह्वान किया। उन्होंने अत में भारत माता की आरती एवं समरसता सहभोज का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के सभी वर्गों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन रमेश सोलंकी द्वारा किया गया।