झाबुआ ज़िले में पिछले कई दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी कर दिया, नदियाँ-नाले उफान पर हैं। गांव-गांव से स्कूल जाने वाले बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी नालों के रास्ते पार करने पड़ रहे हैं। हालात ये हैं कि कई स्कूलों की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं — दीवारें टपक रही हैं, छतों से पानी रिस रहा है।
पड़ोसी जिलों के प्रशासन मौजूदा हालात को समझते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित कर चुके हैं, मगर झाबुआ ज़िला प्रशासन अब भी खामोश बैठा है। सवाल उठता है — क्या जिला प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को लेकर इतना लापरवाह है कि किसी हादसे का इंतजार कर रहा है? लोग अब खुले तौर पर कह रहे हैं कि प्रशासन “कागज़ी मीटिंग्स” और “औपचारिक चेतावनियों” तक ही सिमटा है। लेकिन जिंदगी कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर चलती है।
झाबुआ का प्रशासन कब जागेगा?
क्या बच्चों की जान जोखिम में डालकर भी अफसर सिर्फ़ आंकड़ों का खेल खेलते रहेंगे?
या फिर हादसे के बाद प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेंगे?