मतांतरण रोकने के लिए गांव-गांव में चलेगा जागरूकता अभियान पेसा अधिनियम के तहत ग्राम समितियों के गठन की तैयारी, गांवों के प्रवेश द्वार पर लगेंगे सूचना पट्ट; जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर

उमेश चौहान/झाबुआ

मध्य प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में मतांतरण के मुद्दे और पारंपरिक जनजातीय संस्कृति के संरक्षण को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच ने व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी की है। दीपावली के बाद प्रस्तावित इस अभियान के तहत गांव-गांव में लोगों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही पेसा अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत ग्राम समितियों के गठन, ग्रामसभा की भूमिका को मजबूत करने, गांवों में बाहरी लोगों के आगमन की जानकारी रखने और पलायन करने वाले परिवारों का विवरण संकलित करने जैसे विषयों पर काम करने की योजना बनाई गई है।

जनजाति सुरक्षा मंच की बैठक में अभियान की रूपरेखा और आगे की कार्ययोजना पर मंथन किया गया। मंच का कहना है कि जनजातीय समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जनजातीय बहुल क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाने और ग्रामीणों को उनके अधिकारों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने की तैयारी की जा रही है।

गांवों के प्रवेश द्वार पर लगेंगे सूचना पट्ट

प्रस्तावित अभियान का प्रमुख हिस्सा गांवों के प्रवेश द्वारों पर सूचना पट्ट लगाना है। मंच की योजना के अनुसार इन पट्टों पर ग्रामसभा, पेसा अधिनियम और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण से जुड़े संदेश लिखे जाएंगे। मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि ग्रामसभा के प्रस्तावों के आधार पर बाहरी धर्म प्रचारकों और मतांतरण से संबंधित गतिविधियों को लेकर गांवों में जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

इस पहल के तहत ग्रामीणों को यह जानकारी देने पर भी जोर रहेगा कि गांव में आने वाले बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों और उद्देश्य के संबंध में जानकारी किस प्रकार ग्राम स्तर पर दर्ज की जा सकती है। हालांकि, ऐसी किसी भी व्यवस्था को लागू करते समय पेसा अधिनियम, अन्य लागू कानूनों और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का पालन करना आवश्यक होगा।

झाबुआ सहित पांच जनजातीय जिलों पर विशेष फोकस

जनजाति सुरक्षा मंच के अनुसार झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन सहित प्रदेश के विभिन्न जनजातीय क्षेत्रों में मतांतरण का मुद्दा समय-समय पर सामने आता रहा है। मंच का दावा है कि इन क्षेत्रों में ईसाई धर्म अपनाने वाले जनजातीय लोगों की संख्या 10 लाख से अधिक है। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और इसके लिए प्रयुक्त आंकड़ा-स्रोत स्पष्ट नहीं है।

मंच का मानना है कि जनजातीय समाज की पारंपरिक आस्था, रीति-रिवाज, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए निरंतर जनजागरण जरूरी है। इसी सोच के तहत गांवों में बैठकें, संवाद और जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।

डीलिस्टिंग अभियान भी प्रमुख मुद्दा

जनजाति सुरक्षा मंच पिछले कई वर्षों से डीलिस्टिंग की मांग को लेकर अभियान चलाता रहा है। मंच का तर्क है कि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए उपलब्ध आरक्षण और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ दिए जाने के विषय पर पुनर्विचार होना चाहिए।

इसी मांग के तहत मंच संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन की पैरवी कर रहा है, ताकि धर्म परिवर्तन करने वाले जनजातीय व्यक्तियों की अनुसूचित जनजाति की स्थिति और उनसे जुड़े लाभों के संबंध में कानूनी प्रावधानों पर विचार किया जा सके। यह मंच की मांग है; इस संबंध में किसी भी बदलाव के लिए संवैधानिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारियों का निर्णय आवश्यक होगा।

प्रांत संयोजक बोले—गांव स्तर पर बढ़ाएंगे जागरूकता

जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांत संयोजक मेहताब बड़े के अनुसार, जनजातीय धर्म, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए गांव-गांव में जागरूकता बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पेसा अधिनियम के संदर्भ में ग्रामसभा की भूमिका को सामने रखते हुए सूचना पट्ट लगाने और स्थानीय स्तर पर समितियों के गठन की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।

मंच की कोशिश है कि ग्रामीण अपने पारंपरिक अधिकारों, सांस्कृतिक विरासत और ग्रामसभा की भूमिका के प्रति जागरूक हों। दीपावली के बाद शुरू होने वाले अभियान में जनजातीय बहुल गांवों को प्राथमिकता देने की तैयारी है।

2006 से लगातार सक्रिय है मंच

जनजाति सुरक्षा मंच के आंदोलन का सफर वर्ष 2006 से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इसी वर्ष रायपुर में 14 राज्यों के 85 जनजातीय नेताओं ने मंच का गठन किया था। इसके बाद जनजातीय समाज के अधिकारों, धार्मिक पहचान और डीलिस्टिंग की मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर गतिविधियां आयोजित की गईं।

आंदोलन की प्रमुख तिथियां

– वर्ष 2006:रायपुर में 14 राज्यों के 85 जनजातीय नेताओं की भागीदारी से जनजाति सुरक्षा मंच का गठन।
– **29 अक्टूबर 2020:** राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को मांगपत्र सौंपे जाने का उल्लेख।
– **24 अप्रैल 2022:** धार से डीलिस्टिंग अभियान के तहत जनजागरण रैलियों की शुरुआत।
– **24 मई 2026:** दिल्ली में डीलिस्टिंग की मांग को लेकर रैली आयोजित किए जाने का उल्लेख।

अब गांव स्तर पर अभियान को विस्तार देने की तैयारी

जनजाति सुरक्षा मंच की बैठक में तय की गई प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत अब आंदोलन को गांव स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। ग्राम समितियों के गठन, सूचना पट्ट लगाने, बाहरी लोगों के आगमन की जानकारी संकलित करने और पलायन करने वाले परिवारों का विवरण रखने जैसी गतिविधियों के जरिए स्थानीय स्तर पर संपर्क बढ़ाने की योजना है।

झाबुआ और आसपास के जनजातीय अंचलों में इस अभियान का प्रभाव कितना व्यापक होगा, यह इसके क्रियान्वयन के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल मंच की तैयारी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के मुद्दे को गांव-गांव तक पहुंचाने की है।