“मौत को आत्महत्या बताकर चार दिन तक छुपाती रही टीआई—पोस्टमार्टम ने खोल दी कल्याणपुरा पुलिस की पोल”

उमेश चौहान/झाबुआ

कल्याणपुरा थाना क्षेत्र के खेड़ा गांव में चार दिन पहले बांस की झाड़ियों के नीचे युवक और युवती के शव मिलने की सनसनीखेज घटना अब एक नया मोड़ ले चुकी है। शुरुआती जांच में जहां आत्महत्या के कयास लगाए जा रहे थे, वहीं ताजा पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को पलट कर रख दिया है।
न्याय के लिए एसपी के पास लगाना पड़ी गुहार:
आपको बता दे कि युवक और युवती के शव मिलने की सनसनीखेज वारदात को लेकर कल्याणपुरा थाने की पुलिस शुरू से ही इसे आत्महत्या मान रही थी। चार दिन तक स्थानीय पुलिस ने मामले को सामान्य आत्महत्या की तरह ट्रीट किया।
घटना के बाद पहले दिन से थाने की टीआई न सिर्फ नाकाम रहीं, बल्कि हर बार पीड़ित परिजनों को यही कहकर टरकाती रहीं—”आपकी संतान ने आत्महत्या कर ली, इससे ज्यादा कुछ नहीं।” परिजन बार-बार गुहार लगाते रहे कि हत्या हुई है, सबूत पेश करते रहे, लेकिन टीआई की जिद ने मामले को चार दिन तक सिर्फ आत्महत्या के एंगल में उलझाए रखा। जांच को क्राइम सीन तक सीमित रखने, शक के आधार पर किसी को न पकड़ने और केस की पूरी गहराई में न जाने से आरोपी खुले में घूमते रहे।
इन्हीं पुलिसिया खामियों, ढिलाई और असंवेदनशीलता के कारण परिजन अंत में थाने से निराश होकर सीधे एसपी साहब शिवदयाल सिंह के पास पहुंचे। एसपी साहब को जैसे ही मामला समझ आया, उन्होंने न केवल टीम को फटकार लगाई बल्कि खुद परिवार से मिलकर विश्वास दिलाया—”अब केस हत्या के रूप में ही छानेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” सच्चाई सामने लाने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली की पूरी पोल खोलकर रख दी। रिपोर्ट आते ही पुलिस को मजबूरन हत्या का प्रकरण दर्ज करना पड़ा। एसपी ने फोरेंसिक जांच और गहराई से पड़ताल के निर्देश दिए गए।
पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल:
दरअसल, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस की शुरुआती भूमिका और जांच कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। कई लोगों और परिजनों ने आरोप लगाए हैं कि कल्याणपुरा थाने की पुलिस इस घटना को गंभीरता से नहीं ले रही थी, जिससे अज्ञात आरोपी को छुपने की पर्याप्त सुविधा मिल गई। पुलिस की नाकामी और सुस्ती से परिजन परेशान रहे और उन्होंने अफसरों से न्याय की मांग की।
अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि के बाद पुलिस अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है, लेकिन क्षेत्रीय लोगों के मन में सवाल है कि अगर टीआई पहले दिन से जांच को गंभीरता से लेते तो शायद सच जल्दी सामने आ जाता और आरोपी अब तक पकड़ में आ जाता।
इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड ने कल्याणपुर क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और परिजनों व नागरिकों की नजरें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
पुलिस की एक गलती ने जनता का भरोसा खोया:
कल्याणपुरा में आमजन का भरोसा पुलिस ने अब खो दिया है। खेड़ा गांव की सनसनीखेज घटना में कल्याणपुरा थाने की पुलिस शुरुआत से ही लापरवाह साबित हुई। पेड़ के नीचे झाड़ियों में युवक और युवती के शव मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले को आत्महत्या मानकर निपटा दिया। चार दिन तक केस की गहराई से पड़ताल करने की बजाए थाने की साफ-तोर पर सुस्ती व असंवेदनशीलता नजर आई। ग्रामीणों और परिजनों में पुलिस के प्रति व्यापक रोष है, सभी को लगता है कि “पहले दिन जो काम हो जाना चाहिए था, वह चार दिन तक पुलिस की जिद और लापरवाही के चलते चला गया।” अब जनता की नजर कोर्ट-कचहरी से ज्यादा थाना प्रभारी और जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही पर है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदला पूरा मामला:
सोमवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, जिससे मामला पूरी तरह बदल गया। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि युवक और युवती की हत्या हुई थी। इसके बाद पुलिस को मजबूरन हत्या का प्रकरण दर्ज करना पड़ा और जांच का दायरा बढ़ाया गया। लोगों का कहना है कि अगर कल्याणपुरा टीआई ने पहले दिन से पूरी संजीदगी, तत्परता और प्राथमिकता से काम लिया होता, तो आरोपी आज तक फरार नहीं रहते।
अब सवाल पूरे जिले में यही है: क्या सिर्फ बाहरी दिखावे और रिपोर्टिंग से सच दब जाएगा, या जनता अफसरों से जवाबदेही, और सच्चे न्याय की मांग जारी रखेगी? दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच ही पुलिस की खोई साख लौटा सकती है—वरना टीआई की लापरवाही का यह दाग लंबे समय तक नहीं मिटने वाला।