गाँव-कस्बों की गलियों से निकलकर बेटियाँ आज बड़े मंचों पर अपनी चमक बिखेर रही हैं। इसका ताज़ा उदाहरण झाबुआ के पैलेस गार्डन राजवाड़ा में आयोजित खेलो इंडिया अस्मिता किक बॉक्सिंग लीग-2025 रही, जहाँ पेटलावद की गुरूकुल एकेडमी की छात्राओं ने अपने जज़्बे और हुनर से सभी को चौंका दिया। जूनियर और सब-जूनियर वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए बेटियों ने 9 स्वर्ण, 8 रजत और 8 कांस्य सहित कुल 25 पदक अपने नाम कर दिए। यह जीत साबित करती है कि अब ग्रामीण अंचल की बेटियाँ भी सपनों को पंख लगाकर देश-प्रदेश में अपना नाम रोशन कर रही हैं।
झाबुआ का ऐतिहासिक पैलेस गार्डन राजवाड़ा सोमवार को उस पल का साक्षी बना, जब खेलो इंडिया अस्मिता किक बॉक्सिंग लीग-2025 में बेटियों का हुनर और जज़्बा पूरे संभाग पर छा गया। गाँव-कस्बों की गलियों से निकलकर बड़े सपनों को गले लगाने वाली इन बेटियों ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के बल पर कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।
इस भव्य आयोजन का संचालन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशन में हुआ। प्रतियोगिता का आयोजन एमेच्योर स्पोर्ट्स किक बॉक्सिंग एसोसिएशन म.प्र. तथा इंडिया अस्मिता किक बॉक्सिंग एसोसिएशन ऑफ म.प्र. के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
बेटियों का जलवा:
इस संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में झाबुआ, धार, आलीराजपुर, बड़वानी, इंदौर, रतलाम और नीमच जिलों से 150 से अधिक महिला खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। वहीं, पेटलावद की गुरूकुल एकेडमी की छात्राओं ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचते हुए शानदार प्रदर्शन किया।जूनियर और सब-जूनियर वर्ग में बेटियों ने 9 स्वर्ण, 8 रजत और 8 कांस्य पदक जीतकर कुल 25 पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धि न केवल विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे पेटलावद नगर और झाबुआ ज़िले के लिए गौरवपूर्ण क्षण बन गई।
*कोच और शिक्षक का सराहनीय योगदान:*
इस बेहतरीन सफलता के पीछे कोच दिव्यांश बैरागी का विशेष योगदान सराहनीय रहा। उन्होंने बेटियों को लगातार मेहनत कराकर उन्हें आत्मविश्वासी बनाया। प्रतियोगिता के दौरान शिक्षक-शिक्षिकाएँ श्रीमती जया जैन, श्रीमती ज्योत्सना सेप्टा, श्री राहुल पाटीदार और श्री सौरभ मलिक लगातार बेटियों का हौसला बढ़ाते नजर आए।
अगर लगन और मेहनत सच्ची हो, तो छोटे गाँव-कस्बों से भी चैंपियन निकल सकते हैं: गुरुकुल एकेडमी के संचालक श्री आकाश चौहान ने बेटियों की इस जीत को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि “आज गुरूकुल की बेटियों ने सिद्ध कर दिया कि अगर लगन और मेहनत सच्ची हो, तो छोटे गाँव-कस्बों से भी चैंपियन निकल सकते हैं। ये सिर्फ हमारी संस्थान की ही नहीं, पूरे पेटलावद की जीत है।” विद्यालय समिति अध्यक्षा श्रीमती हर्षिता चौहान ने कहा “यह पल हर उन अभिभावको के लिए गर्व का है, जिन्होंने अपनी बेटियों को सपनों की उड़ान भरने के लिए प्रेरित किया। बेटियाँ आज हर क्षेत्र में आगे बढ़कर समाज और प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं।” विद्यालय प्राचार्य अतुल मेहता ने कहा कि “छात्राओं के इस प्रदर्शन ने हमें भविष्य के लिए और ऊँचे लक्ष्य तय करने का आत्मविश्वास दिया है। हम प्रयास करेंगे कि आने वाले समय में हमारी बेटियाँ सिर्फ राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी परचम लहराएँ।” गुरूकुल की नन्हीं शेरनियों की यह उपलब्धि एक प्रेरणा है—यह बताने के लिए कि कठिन परिश्रम, सही प्रशिक्षण और निरंतर सपनों पर विश्वास से ग्रामीण बेटियाँ भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करने की क्षमता रखती हैं।